बालाघाट के आदिवासी बच्चों की मौत के विरोध में दंतेवाड़ा में न्याय सत्याग्रह
पीड़ित आदिवासी परिवारों को न्याय, दोषियों पर कार्रवाई और स्वास्थ्य मंत्री की इस्तीफा की मांग


भारत अपडेट न्यूज़ दंतेवाड़ा 10/09/26 मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आदिवासी बच्चों की मौत की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।आदिवासी समुदाय के बच्चों की लगातार मौतों और क्षेत्र में सामने आए गंभीर स्वास्थ्य संकट के विरोध में दंतेवाड़ा आदिवासी कांग्रेस द्वारा न्याय सत्याग्रह आंदोलन किया गया।यह न्याय सत्याग्रह अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया जी एवं छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष जनक राम ध्रुव जी के निर्देशानुसार, जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष शंकर कुंजाम के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी और आदिवासी कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए मध्यप्रदेश सरकार से पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने तथा आदिवासी क्षेत्रों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की।इस दौरान पीसीसी सयुक्त महामंत्री छविंद्र कर्मा ने कहा पीसीसी संयुक्त महामंत्री छविंद्र कर्मा ने कहा कि बालाघाट में आदिवासी परिवारों के मासूम बच्चों की मौत बेहद पीड़ादायक और चिंताजनक है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी हो और उन्हें न्याय दिलाए। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उन्हें तत्काल 1-1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद यदि सरकार अपनी जिम्मेदारी तय नहीं करती है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष शंकर कुंजाम ने कहा कि बालाघाट के आदिवासी बच्चों की मौतें केवल एक स्वास्थ्य घटना नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छ पेयजल और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में सरकारी व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करती हैं। बच्चों में मलेरिया, खसरा, विभिन्न संक्रमण, कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आई हैं। आदिवासी कांग्रेस प्रदेश महासचिव विमल सलाम ने कहा आदिवासी समाज के बच्चों की मौत पर सरकार की चुप्पी स्वीकार नहीं की जाएगी। यह केवल बालाघाट के परिवारों का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक आदिवासी परिवार के अधिकार और सम्मान से जुड़ा विषय है। सरकार को संवेदनशीलता के साथ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पीड़ित आदिवासी परिवारों को न्याय मिलने तक आदिवासी कांग्रेस अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी। सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छ पेयजल और समय पर उपचार प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। आज पुरे देश मे जहां भी आदिवासी समाज निवास करता है वहां आदिवासियों के साथ अत्याचार और उनके अधिकारों का हनन करने का काम भाजपा सरकार कर रही है।ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुमित्रा सोरी ने कहा कि आदिवासी समाज के मासूम बच्चों की मौत ने पूरे आदिवासी समाज को झकझोर कर रख दिया है। गरीब और आदिवासी परिवारों को अपने बच्चों के इलाज के लिए परेशान होना पड़े और समय पर उपचार न मिलने के कारण उनकी जान चली जाए, इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है। उन्होंने मांग की कि बालाघाट में मृत प्रत्येक बच्चे के परिवार को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा तत्काल दिया जाए तथा मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला अपने पद से इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल बयानबाजी के बजाय जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। इस दौरान पूर्व विधायक देवती महेंद्र कर्मा, जिला कांग्रेस कमेटी महामंत्री वीरेन्द्र गुप्ता, मनीष भट्टाचार्य, विवेक देवांगन, भीम सेन मांडवी, जिला सचिव गौरव गुप्ता, जितेन्द्र कश्यप, ब्लॉक अध्यक्ष राम रकुमार नाग, राधा नाग,राधा साहू, रिंकी बेंजाम, भरी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।




