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आजीविका गतिविधियों से आत्मनिर्भर बन रही हैं जिले की महिलाएं

मनरेगा के माध्यम से रोजगार और आय के नए अवसर

संवाददाता शुभम सोनी बेमेतरा 07 मार्च 2026:-विश्व महिला दिवस के अवसर पर जिले में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न आजीविका आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्थायी आय के अवसर उपलब्ध कराने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत फार्म पॉण्ड (आजीविका तालाब), मत्स्य पालन तथा कृषि आधारित अन्य गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष 2025-26 में मनरेगा के अंतर्गत महिलाओं द्वारा 15,42,107 मानव दिवस का रोजगार प्राप्त किया गया है, जो कि जिले में सृजित कुल मानव दिवस का लगभग 52.27 प्रतिशत है। यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती सहभागिता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।

 

*रोजगार दिवस पर महिला श्रमिकों का सम्मान*

विश्व महिला दिवस के अवसर पर जिले की सभी ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान महिला श्रमिकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उनका श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रमिकों को क्यूआर कोड आधारित उपस्थिति प्रणाली, मनरेगा श्रम भुगतान व्यवस्था, वीबी ग्रामजी सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई, ताकि श्रमिकों को योजना से जुड़ी सुविधाओं और प्रक्रियाओं के बारे में बेहतर समझ मिल सके।

 

*सफलता की कहानी : आजीविका डबरी से बढ़ी आय*

मनरेगा के अंतर्गत जिले में कई महिलाएं आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण जनपद पंचायत नवागढ़ के ग्राम पंचायत अंधियारखोर की भानमती (पति – आशाराम) हैं। भानमती द्वारा मनरेगा के अंतर्गत आजीविका डबरी (फार्म पॉण्ड) का निर्माण कराया गया। इस डबरी में वे मत्स्य पालन का कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष 50 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। इसके अलावा डबरी के आसपास की भूमि में वे सब्जी उत्पादन भी कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की आय में और वृद्धि हुई है। इस गतिविधि से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि परिवार के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है।

 

*आजीविका गतिविधियों से मिल रहे रोजगार के अवसर*

फार्म पॉण्ड, मत्स्य पालन और कृषि आधारित अन्य गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। कई महिला स्व-सहायता समूह भी इन गतिविधियों से जुड़कर मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन और अन्य आजीविका कार्यों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं। इन पहलों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं अब स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बन रही हैं।

 

*महिलाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण और मार्गदर्शन*

जिला पंचायत के अनुसार शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। फार्म पॉण्ड और मत्स्य पालन जैसे कार्य जल संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिलाओं को इन गतिविधियों से जोड़ने के लिए उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन तथा आवश्यक सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे इन कार्यों को सफलतापूर्वक संचालित कर सकें।

 

*महिला दिवस अवसर पर जल संरक्षण महाअभियान के रूप में मनाया जायेगा*

विश्व महिला दिवस के अवसर पर जिला बेमेतरा में जल संरक्षण महाअभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण महिला को अपने घर में रिचार्ज पिट अथवा सोखता गड्ढा बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि वर्षा जल का संरक्षण हो सके और भूजल स्तर में सुधार लाया जा सके। महिलाओं की भागीदारी से ही संभव है समग्र विकास | विश्व महिला दिवस के अवसर पर यह संदेश दिया गया कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ही समाज का समग्र विकास संभव है। शासन की योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अधिक से अधिक आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

जिले में महिलाओं की बढ़ती सहभागिता यह दर्शाती है कि अवसर और सहयोग मिलने पर महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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