बरगा में मातृ-पितृ पूजन दिवस बना भावनाओं का महासंगम
14 फरवरी वैलेंटाइन नहीं, मातृ-पितृ वंदन का संदेश


संवाददाता शुभम सोनी बेमेतरा -थानखम्हरिया— ग्राम बरगा स्थित बाल संस्कार शिशु मंदिर विद्यालय में आयोजित वार्षिकोत्सव के अवसर पर मातृ-पितृ पूजन दिवस का भव्य एवं भावनात्मक आयोजन हुआ, जिसने पूरे ग्राम को संस्कार और श्रद्धा के अद्भुत वातावरण से सराबोर कर दिया। विद्यालय परिसर आकर्षक सजावट से सुसज्जित था तथा बड़ी संख्या में अभिभावक, ग्रामीणजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के तैलचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मनमोहक श्रृंखला ने सभी का मन मोह लिया, किंतु कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा सामूहिक मातृ-पितृ पूजन समारोह।
भावनाओं से भरा अद्भुत दृश्य
द्वितीय चरण में विद्यार्थियों ने पूर्ण श्रद्धा एवं विधि-विधान से अपने माता-पिता का तिलक कर पूजन किया, पुष्प अर्पित किए, चरण स्पर्श कर परिक्रमा की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सभागार में “मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः” का भाव साकार होता दिखाई दिया। अनेक अभिभावकों की आँखें गर्व और आनंद से नम हो उठीं। वातावरण में भक्ति, कृतज्ञता और संस्कार का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस अवसर पर यह संदेश भी दिया गया कि 14 फरवरी को पश्चिमी प्रभाव में वैलेंटाइन डे मनाने के बजाय भारतीय संस्कृति के अनुरूप मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाकर अपने जीवनदाताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि सच्चा प्रेम वही है जो निस्वार्थ भाव से माता-पिता के चरणों में समर्पित हो।
अतिथि गंगाधर साहू (नवोदय विशेषज्ञ) ने कहा कि बाल्यकाल में दिए गए संस्कार ही जीवन की दिशा और दशा तय करते हैं। मातृ-पितृ पूजन जैसे आयोजन समाज को सुदृढ़ और संस्कारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
समारोह को सफल बनाने में बलराम भाई (भोरमदेव), राधेश्याम प्रधान पाठक (पदमी), मोहन शिक्षक (बेरला), अनुप भाई (बेमेतरा), अयोध्या प्रसाद यदु, प्रदीप कुमार यदु (बेमेतरा), कीर्ति भाई (बहेरा) एवं खोमेंद्र सिन्हा (थानखम्हरिया) का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट विद्यार्थियों का सम्मान किया गया तथा संस्था प्रमुख डॉ. रेवाराम पाल ने सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।




